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Narmdeshwar Mahadev Stone Shivling

नर्मदेश्वर शिवलिंग

नर्मदा नदी के किनारे पाए जाने वाले चिकने पत्थर से बनी शिवलिंग को नर्मदेश्वर महादेव स्टोन शिवलिंग कहते हैं। यह शिवलिंग अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और उसे पूजने से भक्त के जीवन में समस्याओं का नाश होता है। इसे स्वयं अपने घर में रखकर भी पूजा और ध्यान किया जा सकता है।

नर्मदेश्वर महादेव स्टोन शिवलिंग को जल से स्नान कराकर उसे दुध और मधु से अर्चना करनी चाहिए। शिवलिंग को साफ करने के लिए नींबू का रस या दूध का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा नर्मदेश्वर महादेव स्टोन शिवलिंग को घी, शहद और दूध के मिश्रण से अर्चना किया जा सकता है।

इस शिवलिंग को पूजने से प्रतिष्ठा, समृद्धि, स्वस्थ जीवन और सुख की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की कृपा से नर्मदेश्वर महादेव स्टोन शिवलिंग प्रभावी और शक्तिशाली होता है।

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नर्मदेश्वर शिवलिंग को सर्वाधिक शक्तिशाली और पवित्र क्यों माना जाता है ?

– नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा मिलता है ? नर्मदा नदी से निकलने वाले शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहा जाता है.
– नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान ? नर्मदा नदी को शिव के वरदान के कारण इससे प्राप्त होने वाले शिवलिंग को इतना ज्यादा पवित्र माना जाता है.
– भगवान शिव के वरदान के कारण नर्मदा नदी का कण-कण शिव माना जाता है.
– नर्मदा नदी के शिवलिंग को सीधा ही स्थापित किया जा सकता है, इसके प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है.
– कहा जाता है कि, जहां नर्मदेश्वर का वास होता है, वहां काल और यम का भय नहीं होता है.
– व्यक्ति समस्त सुखों का भोग करता हुआ शिवलोक तक जाता है.

नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा विधि?

शिव लिंग को भगवान शिव का निराकार स्वरुप माना जाता है. शिव पूजा में इसकी सर्वाधिक मान्यता है. शिवलिंग में शिव और शक्ति दोनों ही समाहित होते हैं. शिवलिंग की उपासना करने से दोनों की ही उपासना सम्पूर्ण हो जाती है.
विभिन्न प्रकार के शिव लिंगों की पूजा करने का प्रावधान है. जैसे- स्वयंभू शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग, जनेउधारी शिवलिंग, सोने और चांदी के शिवलिंग और पारद शिवलिंग. इनमें से नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और फलदायी मानी जाती है.

–  प्रातःकाल स्नान करके शिवलिंग को एक थाल या बड़े पात्र में रखें.
– बेलपत्र और जल की धारा अर्पित करें.
– इसके बाद शिव जी के मंत्रों का जाप करें.
– थाल या पात्र में एकत्रित जल को पौधों में डाल सकते हैं

नर्मदेश्वर शिवलिंग प्रमुख प्रश्न और उनके उत्तर

घर के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग हो या मंदिर के लिए, इसे स्थापित और पूजा की जा सकती है । यदि कोई चाहे तो इस पवित्र शिवलिंग का अभिषेक का विधान कर सकता है, जिससे मनोकामना प्रकट होने की गति तीव्र हो जाती है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान करने के लिए आपको देखना चाहिए कि यह संगमरमर की तरह चमकदार, साफ, छेद रहित व ठोस हों. प्राकृतिक रूप से बने यह शिवलिंग आपको भारी प्रतीत होते हैं. यह अक्सर छोटे रूपों में पाए जाते हैं.

नर्मदेश्वर शिव लिंग मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी से प्राप्त होते हैं। नर्मदेश्वर शिवलिंग को बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि उन्हें प्राकृतिक रूप से नदी के तल से प्राप्त किया जाता है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि वह हमें कई तरह के भय से बचाता है। कहते हैं कि नर्मदेश्वर शिवलिंग के वास स्थान से काल और यम का भय दूर रहता है। शिव पूजा में शिवलिंग की महत्ता को देखते हुए इसे घर और मंदिर दोनों जगहों पर स्थापित किया जाता है। इसे इन दोनों जगहों पर स्थापित करने के अलग-अलग नियम हैं।

घर में पारद शिवलिंग रखना चाहिए जो चांदी और पारे से मिलकर बना होता है। इसके अलावा स्फटिक शिवलिंग रखना शुभ माना जाता है।

घर में कभी भी बड़े आकार का शिवलिंग नहीं रखना चाहिए. शास्त्रों में अंगूठे के ऊपर वाले पोर से बड़ा शिवलिंग घर में कभी नहीं रखना चाहिए. शिवपुराण में वर्णित है कि घर में एक से अधिक शिवलिंग नहीं होना चाहिए. अगर आपके भी घर में एक से ज्यादा शिवलिंग है तो उसे तुरंत हटा दें.

शिवजी की पूजा के लिए उत्तर दिशा सही मानी गई है। शिवलिंग का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए

उत्तम शिवलिंग उसे कहते हैं जिसके नीचे वेदी बना हो और वह वेदी से चार अंगुल ऊंचा हो। यह सबसे अच्छा शिवलिंग माना गया है।